भरदा के जंगलों में वन विभाग की दस्तक, साल चिरान की लकड़ी जप्तI
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भरदा के जंगलों में वन विभाग की दस्तक, साल चिरान की लकड़ी जप्तI

शशि रंजन सिंह


दहकापारा और बस्दोहरीपारा में सघन सर्चिंग, अवैध कटाई के पीछे संरक्षण किसका? भाजपा नेता के कथित इन्वॉल्वमेंट की भी चर्चा
*शशी रंजन सिंह*

*सूरजपुर/प्रतापपुर( सी एन बी लाइव न्यूज जिला ब्यूरो):---* वन संपदा की अवैध कटाई और जंगलों के दोहन पर अंकुश लगाने वन विभाग द्वारा लगातार सर्चिंग और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 05 अक्टूबर 2026 को उपवनमंडलाधिकारी संस्कृति बारले के मार्गदर्शन एवं वनपरिक्षेत्राधिकारी के सहयोग से वन विभाग की टीम ने ग्राम भरदा के दहकापारा एवं बस्दोहरीपारा में सघन सर्चिंग अभियान चलाया।

इस कार्रवाई में धरमपुर, प्रतापपुर एवं खड़गवां क्षेत्र के वन अमले ने संयुक्त रूप से विभिन्न स्थानों पर जांच की। सर्चिंग के दौरान टीम को साल प्रजाति की चिरान लकड़ी बरामद हुई, जिसे वन विभाग की टीम ने नियमानुसार जप्त कर लिया। जप्त लकड़ी को विभागीय अभिरक्षा में लिया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

अवैध कटाई के पीछे किसका संरक्षण?

वन विभाग की कार्रवाई के बीच स्थानीय स्तर पर इस बात की भी चर्चा सामने आ रही है कि क्षेत्र में कथित तौर पर एक भाजपा नेता के इन्वॉल्वमेंट अथवा प्रभाव के चलते वन संपदा से जुड़े काम संचालित होने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह जानकारी फिलहाल सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है तथा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि जंगल से अवैध रूप से साल की चिरान निकाली जा रही थी, तो इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है? वन विभाग की जांच में यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।

एसडीओ संस्कृति बारले ने कहा—जारी रहेगी कार्रवाई
एसडीओ संस्कृति बारले ने कहा कि वन क्षेत्र में अवैध कटाई और वन संपदा के अवैध दोहन को रोकने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी एवं सर्चिंग की जा रही है। भरदा क्षेत्र में की गई कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। वन संपदा की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

जंगल बचाना सभी की जिम्मेदारी

जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और वन्यजीवों के सुरक्षित आवास का आधार हैं। साल जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों की अवैध कटाई से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है। ऐसे में वन संपदा की सुरक्षा के लिए विभागीय कार्रवाई के साथ आम लोगों की जागरूकता भी जरूरी है।

वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में साल चिरान के स्रोत, कटाई में शामिल लोगों और इसके पीछे किसी संरक्षण या प्रभाव की भूमिका सामने आती है या नहीं। यदि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है।

वन विभाग द्वारा क्षेत्र में लगातार गश्त एवं सर्चिंग जारी रखने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई की जांच आगे किस दिशा में जाती है और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों तक विभाग की कार्रवाई कितनी दूर तक पहुंचती है।
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