हाई मास्क लाइट सहित मैदान और दर्शक दीर्घा, स्टेज को व्यवस्थित करने कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने secl और जिला प्रशासन से किया अनुरोध,
कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर की वर्तमान स्थिति अभी यह है कि यहाँ नगरपालिका क्षेत्र और उससे लगे ग्राम पंचायतों में एक भी मैदान ऐसा नहीं है जिसे आप विशुद्ध रूप से खेल का मैदान कह सके,
शहर के बीच एकमात्र मैदान रामानुज मिनी स्टेडियम जो बचा है, वह साल में आधे समय खेलने के लिए उपलब्ध नहीं होता है,
वीडियो में आप वहां के हालात देख सकते है,
हाल ही में वहां एक हफ्ते से 15 दिन तक स्वंतत्रता दिवस मुख्य समारोह, योग दिवस, वृद्धजन दिवस, सेवा समर्पण कार्यक्रम, गरबा उत्सव, रावण दहन के लिए टेंट लगा रहा, अगले हफ्ते से राज्य उत्सव का आयोजन वहां होगा, जिसके दो महीने बाद 26 जनवरी के लिए फिर तैयारियाँ की जायेंगी,
साल में दो बार परेड के लिए गिराई गई बजरी जिसे कभी हटाया नहीं जाता है, और इन अन्य आयोजनों से होने वाली मैदान की क्षति से आपको देखकर यह मैदान खेल मैदान जैसा तो बिल्कुल नहीं लगेगा,
सेवा समर्पण दिवस पर आधे मैदान में फैली रंगोली आज भी उड़कर खेलने और टहलने वाले को परेशान कर रही है, नगरपालिका का यह अघोषित कांजी हाउस भी है जहां शहर के सारे आवारा पशु लाकर छोड़ा जाता है, बेरिकेटिंग ना होने की वजह से स्टंट कर धूल उड़ाते बाइक सवार बीच मैदान में आपको मिल जाएंगे,
कॉलेज कैंपस में एसपी ऑफिस बन जाने और पीजी कालेज को एलाट जमीन पर चल रहे जिला शिक्षा कार्यालय के वजह से वह मैदान भी अब आधा ही शेष है,
25 30 हजार आबादी वाले जिला मुख्यालय में एक भी पूर्ण खेल मैदान का ना होना यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम विकास की कैसी दौड़ में आगे बढ़ रहे है,
एक ऐसा शहर जिसमें 30 हजार लोगों के लिए खेल के लिए एक भी सुरक्षित मैदान ना हो, क्या हम ऐसा शहर बनाकर आने वाली पीढ़ियों के साथ न्याय कर पाएंगे,
इसी शहर में एक मैदान है secl ग्राउंड, पूरी तरह जीर्ण शीर्ण यह मैदान अभी इस स्थिति में है, खेलना तो छोड़िए आप वहां टहलने के बारे में भी नहीं सोच सकते,
यह मैदान Secl ऑफिसर्स कालोनी के अंदर होने के कारण शहर के आम लोगो की पहुंच से दूर है, कालोनी के अंदर दो गेट क्रॉस करके वहां खेलने या टहलने जाना व्यवहारिक नहीं है, आफिसर्स कालोनी होने के कारण जनसामान्य वहां जाने से भी संकोच करते है कि कही हमें कोई टोक न दिया जाए कोई मना ना कर दे, इसलिए शहर me होकर भी किसी गतिविधि के लिए यह मैदान लोगों के जेहन में ही नहीं आता है,
कोल इंडिया जो कि एक सरकारी उपक्रम है, इस क्षेत्र के लोगों ने अपने पहाड़ चीरकर, अपना वन, नदी, बांध, पर्यावरण खराब करके, यही के मजदूरों ने अपने खून पसीने से इस खदान को संचालित किया है,
शहर और क्षेत्र के आम लोगो का भी अप्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इन खदानों के संचालन में जो योगदान है, उसके बिना खदानों सफल संचालन की कल्पना नहीं की जा सकती थी,
ऐसे में जरूरत है किस इस मैदान के लिए मुख्य मार्ग से एक नियमित प्रवेश द्वार बना दिया जाए, जिसे सुबह से रात तक खोल रखा जाए, रात में बंद कर दिया जाय,
कालोनी जो इससे बिल्कुल अलग और सेफ है, और वहां के लोग इसका उपयोग भी ना के बराबर करते है, बाउंड्री और फेंसिंग के माध्यम से उसे और सेफ करके इस मैदान को शहरवासियों को खेल एवं सामान्य गतिविधियों के लिए खोल दिया जाए,
मेरी निजी राय है यह इस शहर के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है, पर्याप्त पार्किंग, खुली खाली जगह, बड़ा मैदान दर्शक दीर्घा होने की वजह से यह मैदान बहुत ही उपयोगी एवं एक पूर्ण खेल मैदान बन सकता है,
परंतु मुख्य मार्ग से गेट दिए जाने बाद ही यहां आवाजाही सामान्य होगी और लोग खेलने या टहलने जाने में संकोच नहीं करेंगे,
मैदान में हाई मास्क लाइट और पार्क से लगे हुए एक किनारे एक पर सरकारी जिम बनाकर इसे खेलने, जिम करने, दौड़ने टहलने वालों के लिए एक बहुत ही बेहतर जगह के रूप में विकसित किया जा सकता है,
हेचरी विस्थापन के बाद इस मैदान के सामने उसके एक हिस्से में शहर के लोगों की एक जरूरी मांग आडिटोरियम वहां पर बनाकर किसी बड़े आयोजन में यह मैदान बतौर पार्किंग भी उपयोग में लाया जा सकता है,
मै चाहता हु कि आगामी चुनाव के सभी अध्यक्ष पार्षद प्रत्याशी शहर हित में इसे अपने चुनावी एजेंडे में जरूर शामिल करे,
मेरा विश्वास है अगर सभी मिलकर शहर के व्यापारी, सामाजिक संगठन आम नागरिक जनप्रतिनिधि इसके लिए प्रयास करेंगे तो यह मैदान शहर को उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल नहीं होगा,
आगामी चुनाव यह अवसर है कि हम शहर के हित से जुड़ी ऐसी मांगो को सामने लाये इस चुनाव में ऐसे मुद्दों पर बहस विचार करे, प्रत्याशियों पर इस सम्बंध में उनकी सोच और क्रियान्वयन की योजना पूछे,
ताकि शहर के हित की कुछ चीजें यहां तैयार की जा सके,


