मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। मनेन्द्रगढ़ के शासकीय अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु को गंभीर चोट लगने का मामला सामने आया है। नवजात के पिता द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को दिए गए लिखित आवेदन में प्रसव के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का दावा है कि जन्म के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे पहले अंबिकापुर और बाद में रायपुर रेफर किया गया, जहां जांच और एक्स-रे में बच्चे के बाएं हाथ तथा दोनों पैरों के जोड़ की हड्डियों में चोट/फ्रैक्चर बताए गए।
प्रसव से पहले सोनोग्राफी में बच्चे की स्थिति असामान्य बताने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसकी पत्नी का प्रसव 10 सितंबर 2026 को मनेन्द्रगढ़ के शासकीय अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हुआ। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रसव से पहले सोनोग्राफी में चिकित्सकों द्वारा बच्चे की स्थिति सामान्य नहीं होने, बल्कि आड़ी/उल्टी स्थिति में होने की जानकारी दी गई थी।
इसके बावजूद परिजनों का आरोप है कि सामान्य प्रसव कराया गया। प्रसव के करीब 30 मिनट बाद परिवार को बताया गया कि नवजात की स्थिति गंभीर है और उसके पेट में गंदा पानी चले जाने के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसके बाद बच्चे को उपचार के लिए अंबिकापुर रेफर किया गया।
अंबिकापुर में जांच और एक्स-रे के बाद सामने आई चोट
शिकायत में आगे बताया गया है कि अंबिकापुर पहुंचने के बाद नवजात की चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे कराया गया। परिजनों के अनुसार, वहां चिकित्सकों ने बच्चे के बाएं हाथ और दोनों पैरों के जोड़ की हड्डियों में फ्रैक्चर/चोट होने की बात बताई। शिकायतकर्ता का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा इसे प्रसव के दौरान हुई चोट बताया गया।
इसके बाद बच्चे का उपचार किया गया, लेकिन लगभग एक दिन बाद उसकी स्थिति गंभीर बताते हुए उसे रायपुर के DKS अस्पताल रेफर किया गया। शिकायत के अनुसार, वहां भर्ती से संबंधित परेशानी आने के बाद बच्चे को मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया।
मेकाहारा में भी एक्स-रे में चोट की बात आने का दावा
परिजनों का कहना है कि मेकाहारा में भी नवजात की चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे किया गया, जिसमें बच्चे के बाएं हाथ और दोनों पैरों के जोड़ में हड्डी टूटने/चोट की बात सामने आई। इन रिपोर्टों के आधार पर पिता ने मनेन्द्रगढ़ अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई कथित लापरवाही की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में संबंधित एक्स-रे रिपोर्ट एवं सोनोग्राफी रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सीएचएमओ बोले—कमेटी करेगी जांच, रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर सीएचएमओ डॉ. विनाश खरे का कहना है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच एक कमेटी के माध्यम से कराई जाएगी। कमेटी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड, सोनोग्राफी एवं एक्स-रे रिपोर्ट तथा उपचार से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी।
सीएचएमओ के अनुसार, जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर निश्चित कार्रवाई की जाएगी।
उठ रहे हैं कई सवाल
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रसव से पहले बच्चे की स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी चिकित्सकीय जांच में सामने आई थी, तो प्रसव की प्रक्रिया किस आधार पर तय की गई? प्रसव के दौरान नवजात को चोट कैसे लगी? क्या यह चोट प्रसव प्रक्रिया के दौरान लगी या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल मामला आरोपों और शिकायत तक सीमित है। किसी चिकित्सक की जिम्मेदारी या लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही किया जा सकेगा।
CNB LIVE NEWS के लिए मुख्य सवाल:
क्या प्रसव के दौरान नवजात को लगी गंभीर चोट की जिम्मेदारी तय होगी? क्या मेडिकल रिकॉर्ड और एक्स-रे रिपोर्ट के आधार पर सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच होगी? अब निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर हैं।


