CG कोरिया वन अमले की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल..."रेंजर निवास से महज 4 किमी दूर जंगल में कटे मिले हरे पेड़, लावारिस पड़ी लकड़ियां.., आखिर किसकी अनुमति से हुई पेड़ों की कटाई?
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CG कोरिया वन अमले की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल..."रेंजर निवास से महज 4 किमी दूर जंगल में कटे मिले हरे पेड़, लावारिस पड़ी लकड़ियां.., आखिर किसकी अनुमति से हुई पेड़ों की कटाई?

 



सोनहत/कोरिया। कोरिया वन मंडल के सोनहत वन परिक्षेत्र में जंगलों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। सोनहत रेंजर निवास से करीब 4 किलोमीटर दूर खुटरापारा से कर्री पहुंच मार्ग के आसपास जंगल में कई पेड़ कटे हुए दिखाई दे रहे हैं। मौके पर कटे हुए तने, शाखाएं और लकड़ियां लावारिस हालत में पड़ी नजर आ रही हैं।

मौके की तस्वीरों में एक स्थान पर पेड़ का ताजा कटा हुआ ठूंठ दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर कटे हुए पेड़ और उनकी शाखाएं जंगल में ही पड़ी हैं। इससे वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

रेंजर निवास के इतने करीब कटाई, फिर भी वन अमले को भनक नहीं?

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि यह कटाई अवैध रूप से हुई है, तो रेंजर निवास से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कैसे होती रही?

वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बीट स्तर पर नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था रहती है। ऐसे में कटे हुए पेड़ और जंगल में पड़ी लकड़ियां वन अमले की नजर में क्यों नहीं आईं, यह जांच का विषय है।

हालांकि, उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेड़ों की कटाई अवैध ही है। कटाई विभागीय अनुमति से हुई या बिना अनुमति के, इसकी पुष्टि वन विभाग की जांच और संबंधित रिकॉर्ड से ही हो सकती है।

कटे पेड़ और लकड़ियां मौके पर ही क्यों?

मौके पर कटे हुए पेड़ों की लकड़ियां और शाखाएं पड़ी होने से एक और सवाल उठ रहा है कि आखिर पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को जंगल से बाहर क्यों नहीं ले जाया गया।

क्या लकड़ियों को बाद में उठाने की तैयारी थी या किसी अन्य कारण से उन्हें मौके पर ही छोड़ दिया गया—यह भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वन विभाग के सामने कई सवाल

क्या संबंधित क्षेत्र में नियमित बीट गश्त की जा रही थी?

कटे हुए पेड़ों की संख्या और प्रजाति क्या है?

पेड़ों की कटाई कब की गई?

क्या पेड़ काटने के लिए विभागीय अनुमति ली गई थी?

यदि अनुमति नहीं थी तो अब तक मौके का निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जंगल में पड़ी लकड़ियों का पंचनामा बनाकर उन्हें जब्त किया गया या नहीं?

वन अमले की निगरानी व्यवस्था में कहीं चूक हुई है या नहीं?


मौके का निरीक्षण जरूरी

मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए वन विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान कटे हुए पेड़ों की संख्या, प्रजाति, मोटाई, कटाई की स्थिति और मौके पर पड़ी लकड़ियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है। साथ ही विभागीय रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित क्षेत्र में किसी प्रकार की कटाई की अनुमति जारी हुई थी या नहीं।

अब कार्रवाई पर टिकी नजर

रेंजर निवास से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर जंगल में कटे पेड़ों की तस्वीरें सामने आने के बाद अब निगाहें सोनहत वन परिक्षेत्र और कोरिया वन मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। सवाल यह है कि विभाग इस मामले में मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।

यदि जांच में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि कटाई विभागीय अनुमति के तहत हुई है, तो विभाग को अनुमति और कटाई से संबंधित तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

फिलहाल तस्वीरें सवाल जरूर खड़े करती हैं, लेकिन कटाई को अवैध घोषित करने से पहले विभागीय जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना आवश्यक है।




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