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बैकुण्ठपुर। आगामी जाति जनगणना को लेकर कोरिया जिले में जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। विभाग के जिलाध्यक्ष रामकृष्ण साहू के नेतृत्व में कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए वैज्ञानिक, प्रमाणिक और एकरूप जाति जनगणना कराने की मांग की गई।
कांग्रेस का कहना है कि देश में एक ही जाति के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम, उपनाम, स्थानीय नाम और वर्तनी प्रचलित होने के कारण जनगणना के आंकड़ों में अंतर की संभावना रहती है। ऐसे में वास्तविक जनसंख्या का सही आंकलन और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों का निर्माण प्रभावित हो सकता है।
ज्ञापन में OBC श्रेणी के लिए स्पष्ट प्रावधान, प्रत्येक जाति एवं समुदाय के लिए यूनिक वैज्ञानिक कोड, राज्यवार मानकीकृत जाति मास्टर लिस्ट तथा डिजिटल जनगणना के लिए सर्चेबल ड्रॉप-डाउन व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई है।
कांग्रेस की मांग—गलत आंकड़ों की गुंजाइश खत्म हो
ज्ञापन में कहा गया है कि एक ही समुदाय के अलग-अलग नामों को अलग-अलग जातियों के रूप में दर्ज होने से रोकने के लिए प्रमाणित पर्यायवाची, क्षेत्रीय नाम और वर्तनी के विभिन्न रूपों को एक वैज्ञानिक कोड से जोड़ा जाना चाहिए
कांग्रेस ने जाति जनगणना की प्रक्रिया अंतिम रूप देने से पहले समाजशास्त्र, जनसांख्यिकी, डेटा मैनेजमेंट, सामाजिक न्याय और अन्य संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श की मांग भी की है। साथ ही तेलंगाना के SEEEP जाति सर्वेक्षण से जुड़े अनुभवों का अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है।
अब शासन-प्रशासन से सीधे सवाल
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सवाल यह है कि क्या शासन आगामी जनगणना में जातियों के आंकड़ों को अधिक वैज्ञानिक और प्रमाणिक बनाने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं पर विचार करेगा?
क्या एक ही जाति के अलग-अलग नामों और क्षेत्रीय पहचान के कारण आंकड़ों में संभावित विसंगतियों को रोकने के लिए कोई मानकीकृत व्यवस्था तैयार की जाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल—OBC सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा सुनिश्चित करने के लिए शासन की क्या ठोस तैयारी है?
कांग्रेस का दावा है कि सही आंकड़े ही सही नीति का आधार बन सकते हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और जाति जनगणना की प्रक्रिया को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई मांगों पर शासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।




