एमसीबी/भरतपुर। जिले के चनवारीडांड वार्ड क्रमांक 01 स्थित स्कूलपारा में आम रास्ता बंद किए जाने की शिकायत को दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ग्रामीणों को प्रशासनिक राहत नहीं मिल पाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ता बंद होने के कारण कई परिवारों का आवागमन प्रभावित है, लेकिन शिकायत के बाद भी मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले में 21 जुलाई 2026 को वार्ड क्रमांक 01 स्कूलपारा निवासी सीताराम यादव, पिता दही यादव, उम्र 65 वर्ष ने अन्य ग्रामीणों के साथ जिला प्रशासन के समक्ष जनदर्शन में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था।
आरोप—खूंटा गाड़कर की जा रही घेराबंदी
शिकायत के अनुसार, सीताराम यादव के घर के सामने स्थित भूमि पर पड़ोसी रामनरेश पटेल द्वारा खूंटा गाड़कर घेराबंदी किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस घेराबंदी के कारण वर्षों से उपयोग में आने वाला रास्ता बाधित हो गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे सीताराम यादव के परिवार के साथ-साथ आसपास रहने वाले 7 से 8 अन्य परिवारों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक रास्ता बंद होने से रोजमर्रा के काम, बच्चों के स्कूल आने-जाने और आपातकालीन परिस्थितियों में आवाजाही को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है।
70 वर्षों से रह रहे हैं, फिर रास्ता क्यों बंद?
शिकायतकर्ता सीताराम यादव का कहना है कि उनका परिवार करीब 70 वर्षों से उक्त क्षेत्र में निवास करता आ रहा है। ऐसे में वर्षों से उपयोग किए जा रहे रास्ते के बंद होने से ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रास्ते को लेकर विवाद है तो प्रशासन मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं कर रहा?
जनदर्शन में शिकायत, फिर भी कार्रवाई अधूरी क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराते समय उन्हें शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। लेकिन शिकायत के बाद काफी समय बीतने के बावजूद मौके की स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।
ऑनलाइन शिकायत की स्थिति भी ‘अपूर्ण’ दिखाई देने की बात सामने आई है। इससे ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उनकी शिकायत किस स्तर पर लंबित है और मौके पर जांच कब होगी?
जिला प्रशासन से सीधे सवाल
▶ क्या संबंधित अधिकारी ने अब तक मौके का निरीक्षण किया है?
▶ यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो दो सप्ताह से अधिक समय से शिकायत लंबित क्यों है?
▶ वर्षों से उपयोग किए जा रहे रास्ते को लेकर प्रशासन की क्या रिपोर्ट है?
▶ क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके की सीमांकन/स्थल जांच कराई गई है?
▶ रास्ता वास्तव में सार्वजनिक/आम निस्तार मार्ग है तो उसे तत्काल खुलवाने की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
▶ यदि भूमि निजी है तो प्रभावित परिवारों के वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कौन करेगा?
▶ ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत ‘अपूर्ण’ क्यों दिखाई जा रही है?
गरीब परिवारों के लिए रास्ता सबसे बड़ी जरूरत
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन या रास्ते के विवाद तक सीमित नहीं है। रास्ता बंद होने का सीधा असर उन परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है, जिनके लिए आवागमन का यही प्रमुख साधन है।
बच्चों के स्कूल जाने से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को बाहर ले जाने तक रास्ते की जरूरत पड़ती है। ऐसे में यदि किसी विवाद के कारण रास्ता बाधित है तो प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच करे और नियमों के तहत तत्काल समाधान निकाले।
ग्रामीणों की मांग—मौके पर पहुंचे अधिकारी
पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए, भूमि एवं रास्ते की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और यदि रास्ता आम निस्तार का है तो उसे बाधामुक्त कराया जाए।
साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी पक्ष द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से रास्ता बाधित किया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
अब देखना यह है...
जनदर्शन में शिकायत के बाद भी यदि ग्रामीणों को अपने आवागमन के लिए रास्ते की समस्या से जूझना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
आखिर जिला प्रशासन गरीब परिवारों को आवागमन का रास्ता कब दिला पाएगा?
क्या संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे?
क्या वर्षों से उपयोग किए जा रहे रास्ते का राजस्व रिकॉर्ड और निस्तार अधिकार स्पष्ट किया जाएगा?
और सबसे अहम—ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी?
इन सवालों के जवाब अब जिला प्रशासन की कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
CNB LIVE NEWS — जनता की समस्या, प्रशासन से सीधा सवाल।


