सूरजपुर। जिले के गिरजापुर क्षेत्र में करीब ₹1 करोड़ 36 लाख की लागत से निर्मित बताई जा रही नहर की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नहर के अलग-अलग हिस्सों में दरारें और टूट-फूट दिखाई दे रही है। कुछ स्थानों पर नहर का किनारा क्षतिग्रस्त नजर आ रहा है, जिससे निर्माण कार्य की मजबूती और गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च कर तैयार की गई नहर में यदि निर्माण के बाद ही दरारें दिखाई देने लगी हैं, तो आखिर निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई थी?
निर्माण के बाद ही दरारें, आखिर वजह क्या?
सामने आई तस्वीरों में नहर के कंक्रीट हिस्से में स्पष्ट दरारें दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ हिस्सों में संरचना टूटती हुई नजर आती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि दरारें आखिर किस कारण से आईं।
क्या निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया था?
क्या कंक्रीट की गुणवत्ता की जांच हुई थी?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया?
या फिर निर्माण के दौरान निगरानी में कहीं लापरवाही हुई?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से मिलना जरूरी है।
जनता के पैसे से बना काम, जवाबदेही भी जरूरी
सरकारी निर्माण कार्यों में खर्च होने वाली राशि जनता के पैसे से आती है। इसलिए करोड़ों रुपये की लागत वाले किसी भी निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुसार कराया गया है तो विभाग को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि तस्वीरों में दिखाई दे रही दरारों और टूट-फूट का तकनीकी कारण क्या है। वहीं यदि जांच में निर्माण की गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
सिस्टम से सीधे सवाल
▶ ₹1 करोड़ 36 लाख के इस कार्य की गुणवत्ता जांच किसने की?
▶ निर्माण के दौरान विभागीय अधिकारियों ने कितनी बार स्थल निरीक्षण किया?
▶ इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण हुआ था या नहीं?
▶ कार्य की निर्धारित मोटाई और तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं?
▶ निर्माण पूर्ण होने के बाद कार्य का निरीक्षण और सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
▶ यदि निर्माण गुणवत्तापूर्ण था तो इतनी जल्दी दरारें क्यों दिखाई दे रही हैं?
▶ क्या विभाग अब मौके पर तकनीकी टीम भेजकर जांच कराएगा?
स्वतंत्र तकनीकी जांच से सामने आ सकता है सच
तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति या निर्माण एजेंसी को सीधे दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन जिस तरह नहर के हिस्सों में दरारें और टूट-फूट दिखाई दे रही है, उसे देखते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है।
जांच में निर्माण की डिजाइन, इस्तेमाल की गई सामग्री, कंक्रीट की गुणवत्ता, संरचना की मोटाई, मिट्टी एवं जल दबाव तथा निर्माण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौजूदा क्षति प्राकृतिक अथवा तकनीकी कारणों से हुई है या निर्माण गुणवत्ता में कमी इसकी वजह है।
अब कार्रवाई का इंतजार
गिरजापुर क्षेत्र में सामने आई इन तस्वीरों ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण और तकनीकी जांच कराता है या नहीं।
यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता अथवा गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो दोषियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि जनता के पैसों से बने निर्माण कार्य महज कागजों में पूर्ण न रहें, बल्कि जमीन पर भी लंबे समय तक टिकाऊ साबित हों।
CNB LIVE NEWS की नजर अब इस मामले में होने वाली विभागीय जांच और कार्रवाई पर रहेगी।
रिपोर्ट: CNB LIVE NEWS
स्थान: गिरजापुर, जिला सूरजपुर, छत्तीसगढ़


