बैकुण्ठपुर। जिला कोरिया के जनपद पंचायत सोनहत एवं थाना सोनहत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोयनी में करीब छह महीने पहले निर्मित सड़क के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। सड़क की सतह पर लंबी दरारें और टूट-फूट दिखाई देने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क खराब होने लगी। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ किया गया होता, तो इतनी कम अवधि में सड़क की ऐसी स्थिति नहीं बनती।
भ्रष्टाचार का कौन जिम्मेदार?
सड़क के समय से पहले क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण में कहीं गुणवत्ता मानकों की अनदेखी तो नहीं हुई।
हालांकि, सड़क के टूटने को लेकर भ्रष्टाचार या किसी अधिकारी की मिलीभगत की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों और मौके की तकनीकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
इन बिंदुओं की जांच जरूरी
जानकारों के अनुसार सड़क के जल्द खराब होने के पीछे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सबग्रेड की पर्याप्त मजबूती, निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण तथा बारिश के पानी की निकासी जैसी वजहें हो सकती हैं। इसलिए सड़क निर्माण से संबंधित स्वीकृत प्राक्कलन, तकनीकी मापदंड, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और किए गए भुगतान की जांच महत्वपूर्ण होगी।
मौके पर तकनीकी टीम द्वारा सड़क की जांच किए जाने से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं।
ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से सड़क का स्थल निरीक्षण कराकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि सड़क अभी गारंटी अवधि में है, तो नियमानुसार उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी तय की जाए और सड़क को गुणवत्तापूर्ण तरीके से दुरुस्त कराया जाए।
अब सवाल यह है कि छह महीने में सड़क के क्षतिग्रस्त होने की वास्तविक वजह क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है? इसका जवाब विभागीय एवं तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


