रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक प्रकाशित रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश के कई सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में क्लासिकल और पेटेंट आयुर्वेदिक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित है, जिसके कारण गरीब मरीजों को आवश्यक दवाएं बाहर से खरीदने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्लासिकल आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी लंबे समय से नहीं हुई है, जबकि पेटेंट दवाओं की खरीदी भी कई महीनों से प्रभावित बताई गई है। इसके अलावा दर्द निवारक तेल सहित अन्य आवश्यक आयुर्वेदिक सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
CGMSC के स्टॉक पर भी सवाल
प्रकाशित सामग्री में CGMSC के वेयरहाउस में आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक बेहद कम अथवा शून्य होने का दावा किया गया है। आरोप है कि आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अस्पतालों में मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि CNB LIVE NEWS द्वारा नहीं की गई है। प्रदेश में वास्तविक स्थिति जानने के लिए CGMSC तथा स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों और अस्पतालवार स्टॉक की जानकारी सामने आना जरूरी है।
गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ का आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना स्वाभाविक है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों के लिए दवाओं की नियमित उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
मलेरिया और रेबीज की दवाओं को लेकर भी सवाल
प्रकाशित रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया सहित अन्य बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं कुत्ते के काटने के बाद दी जाने वाली रेबीज संबंधी दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने का दावा भी किया गया है।
इन दावों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग को जिलेवार आवश्यक दवाओं के स्टॉक और वितरण की स्थिति सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विभाग से CNB LIVE NEWS के सवाल
▶ क्लासिकल आयुर्वेदिक दवाओं की पिछली खरीदी कब हुई थी?
▶ पेटेंट आयुर्वेदिक दवाओं की वर्तमान उपलब्धता कितनी है?
▶ CGMSC के वेयरहाउस में वर्तमान में आयुर्वेदिक दवाओं का कितना स्टॉक है?
▶ क्या किसी सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का स्टॉक शून्य है?
▶ यदि दवाओं की कमी है तो नई खरीदी में देरी का कारण क्या है?
▶ गरीब मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है?
▶ क्या अस्पतालों से दवाओं की कमी को लेकर मांग भेजी गई है और उस पर क्या कार्रवाई हुई?
सरकारी दावे और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की जांच जरूरी
सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की कमी के आरोप सामने आते हैं तो उनका तथ्यात्मक परीक्षण जरूरी है।
दूसरी ओर, यदि प्रकाशित रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं तो स्वास्थ्य विभाग और CGMSC को अस्पतालवार स्टॉक की जानकारी जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि मरीजों और आम जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण
इस पूरे मामले में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और CGMSC का पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है। CNB LIVE NEWS आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। विभागीय जवाब, खरीदी के रिकॉर्ड और वर्तमान स्टॉक की जानकारी मिलने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
CNB LIVE NEWS का सवाल:
सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की वास्तविक स्थिति क्या है—क्या मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो रही हैं, या फिर उन्हें बाजार से दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है?
नोट: इस खबर में उल्लेखित दवा की कमी, खरीदी में देरी और CGMSC के स्टॉक संबंधी बातें प्रकाशित रिपोर्ट/प्राप्त आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


