नई दिल्ली। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने सेवारत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर टीईटी पास नहीं करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) रुक सकती है। वहीं, 31 अगस्त 2028 के बाद इस समय-सीमा में किसी भी प्रकार का विस्तार नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिका पर दिए आदेश में राज्य सरकारों को नियमित रूप से वर्ष में दो बार टीईटी परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी सेवारत शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर पात्रता प्राप्त करने का अवसर मिल सके।
अदालत के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम का समय शेष है, वे सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रह सकेंगे, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। जबकि अन्य शिक्षक यदि निर्धारित समय तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं करते हैं, तो उनकी सेवा समाप्त होने का खतरा बना रहेगा।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित किया जाए तथा प्रशिक्षण और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी शिक्षक अवसर के अभाव में सेवा से वंचित न हो।


