रात 12:25 बजे तक खुला रहा महिला एवं बाल विकास विभाग का परियोजना कार्यालय, देर रात गतिविधियों पर उठे सवालकोरिया/बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय के देर रात तक खुले रहने को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार मंगलवार की रात लगभग 12:25 बजे तक परियोजना कार्यालय खुला रहा, जबकि बुधवार को भी रात 10:17 बजे तक कार्यालय में गतिविधियां जारी रहीं। इससे कार्यालयीन समय और शासकीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में पूर्व में भी समाचार प्रकाशित हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा जांच अथवा कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।
सामान्यतः छत्तीसगढ़ शासन के अधिकांश कार्यालयों का निर्धारित समय प्रातः लगभग 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक होता है। कार्यालयीन समय के बाद यदि किसी विभाग में कार्य कराया जाता है, तो उसके लिए प्रशासनिक आवश्यकता, सक्षम अधिकारी की अनुमति तथा नियमानुसार अभिलेखों का संधारण अपेक्षित माना जाता है। ऐसे में लगातार देर रात तक कार्यालय संचालित होना स्वाभाविक रूप से जांच का विषय बन रहा है।
मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि परियोजना अधिकारी अनुपम सिंह द्वारा शासकीय वाहन का कथित रूप से नियमों के विपरीत उपयोग किया जा रहा है। दावा किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी में अवकाश के दिनों में भी शासकीय वाहन के उपयोग का उल्लेख है। यदि ऐसा है, तो यह जांच का विषय हो सकता है कि वाहन का उपयोग किस उद्देश्य से और किस सक्षम स्वीकृति के आधार पर किया गया।
इसी प्रकार यह भी चर्चा में है कि परियोजना कार्यालय के एक लिपिक पन्ना बाबू देर रात तक कार्यालय में कार्य करते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे दिन में अधिकारी के साथ विभिन्न स्थानों पर रहते हैं और रात में कार्यालयीन कार्य करते हैं। यदि किसी कर्मचारी से नियमित कार्यालय समय के अतिरिक्त कार्य लिया जाता है, तो उसके लिए शासन के निर्धारित नियमों एवं आदेशों का पालन किया जाना आवश्यक होता है।
नियम क्या कहते हैं?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अनुसार प्रत्येक शासकीय कर्मचारी को अपने कर्तव्यों का निर्वहन नियमों एवं शासन के निर्देशों के अनुरूप करना होता है।
वहीं, छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता एवं शासकीय वाहन उपयोग संबंधी निर्देशों के अनुसार शासकीय वाहन का उपयोग केवल शासकीय कार्यों के लिए तथा सक्षम अधिकारी के निर्देशानुसार किया जा सकता है। वाहन उपयोग से संबंधित लॉगबुक में यात्रा का उद्देश्य, समय, दूरी एवं अन्य आवश्यक विवरण दर्ज किया जाना अनिवार्य होता है।
यदि कार्यालय निर्धारित समय से अधिक संचालित किया जाता है, तो उसके लिए प्रशासनिक आवश्यकता एवं सक्षम अधिकारी की स्वीकृति का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। यदि लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित मामलों में विभागीय जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या जिला प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में जांच के आदेश देता है या नहीं तथा देर रात तक कार्यालय संचालन, शासकीय वाहन के कथित उपयोग और कार्यालयीन कार्यप्रणाली को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी शासकीय कार्यालयों के लिए समान नियम निर्धारित हैं, तो उनका पालन भी समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।(सोर्स >सूत्र)


