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छत्तीसगढ़//संतोष सिंह सूर्यवंशी)
**रायपुर:** छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से गायत्री मंत्र, सरस्वती वंदना और भोजन मंत्र अनिवार्य किए जाने के शिक्षा विभाग के फैसले पर सूबे की सियासत गरमा गई है। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता **टी.एस. सिंहदेव (TS Singh Deo)** ने साय सरकार के इस आदेश को आड़े हाथों लेते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सामाजिक ताने-बाने और संवैधानिक ढांचे पर आघात बताया है।
सिंहदेव ने सरकार के इस नियम को 'संकीर्ण और अनैतिक' करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने या इसमें बदलाव करने की मांग की है।
### **"गुलदस्ते जैसा है छत्तीसगढ़, थोपना 'वसुधैव कुटुंबकम' के खिलाफ"**
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने प्रदेश की अनूठी संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक गुलदस्ता है। यहाँ गोंड, उरांव, कँवर, बैगा और हलबा जैसे गौरवशाली जनजातीय समाज की अपनी परंपराएं हैं। इसके साथ ही बाबा गुरु घासीदास की सतनाम परंपरा, कबीरपंथ, सिख, जैन, बौद्ध, मुस्लिम और ईसाई समुदाय सदियों से आपस में मिलजुल कर रहते आए हैं।
> "सनातन परंपरा हमें 'वसुधैव कुटुंबकम' और सबको साथ लेकर चलने की सीख देती है, किसी पर कुछ थोपने की नहीं। मां सरस्वती की वंदना और गायत्री मंत्र का हमारे हृदयों में सर्वोच्च स्थान है, लेकिन प्रार्थना आंतरिक स्वीकार्यता से आती है, प्रशासनिक डर और दंड से नहीं।" **- टी.एस. सिंहदेव**
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### **समावेशी कार्यक्रम बने या आदेश वापस हो**
सिंहदेव ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अगर सरकार कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम बनाना ही चाहती है, तो वह समावेशी होना चाहिए। इसमें सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र के साथ-साथ:
* आदिवासी समाज की **सरना पूजा और बूढ़ादेव की स्तुति**
* **सतनाम और कबीरपंथ** के मानवतावादी संदेश
* **कुरान और बाइबिल** की पवित्र आयतें
* **गुरुग्रंथ साहिब** की सीख
* **बौद्ध और जैन धर्म** के शांति संदेशों को भी सामूहिक स्थान मिलना चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं कर सकती, तो इस संकीर्ण नियम को तत्काल वापस लिया जाए।
### **"मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश, DEO प्रार्थना के पहरेदार न बनें"**
कांग्रेस नेता ने शिक्षा विभाग के इस हालिया आदेश को प्रदेश के बुनियादी संकटों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा चरित्र निर्माण परस्पर सम्मान से आता है, किसी को दरकिनारे करने से नहीं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा:
* **बंद हो रहे स्कूल:** 'युक्तियुक्तकरण' के नाम पर प्रदेश में 10,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर हैं।
* **बुनियादी ढांचे की कमी:** स्कूलों की छतें जर्जर हैं और शिक्षकों की भारी कमी है।
* **अधिकारियों की जिम्मेदारी:** जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को प्रार्थनाओं का पहरेदार बनाने के बजाय स्कूलों की बदहाली सुधारने और मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचने के काम में लगाया जाना चाहिए।
सिंहदेव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब प्रदेश बढ़ती बेरोजगारी, चरमराती बिजली व्यवस्था और कमरतोड़ महंगाई से जूझ रहा है, ऐसे में यह आदेश सामाजिक भाईचारे को नुकसान पहुँचाने वाला है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
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