*शशी रंजन सिंह*
*भैयाथान, सूरजपुर(ट्रैक सी जी न्यूज ब्यूरो चीफ):--*विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई सामने आई है। जनपद पंचायत भैयाथान के ग्राम पंचायत सत्यनगर स्थित नवापारा आंगनबाड़ी केंद्र में पिछले 15 वर्षों से पानी की एक बूंद तक की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। सवाल उठता है—क्या मासूमों की प्यास की कोई कीमत नहीं?
विकास के दावे, जमीनी हकीकत फेल!
सरकारी योजनाओं में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से लैस करने की बातें होती हैं, लेकिन यहां हालात इतने बदतर हैं कि बच्चों और महिलाओं को बिना पानी के ही दिन गुजारना पड़ रहा है। गर्मी के इस भीषण दौर में यह लापरवाही और भी खतरनाक साबित हो रही है।
मासूमों की सेहत से खिलवाड़
जहां बच्चों को पोषण और देखभाल मिलनी चाहिए, वहां उन्हें प्यास और परेशानी झेलनी पड़ रही है। गर्भवती और धात्री महिलाएं भी इस अव्यवस्था का शिकार हैं—जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
15 साल, दर्जनों शिकायतें... फिर भी सन्नाटा!
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार महिला एवं बाल विकास विभाग को लिखित शिकायत दी, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
ग्रामीणों का कहना है—
"अगर 15 साल में पानी नहीं पहुंचा, तो योजनाएं सिर्फ कागजों में ही बह रही हैं!"
अब आर-पार की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों ने दो टूक कहा है—
“अगर जल्द पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो आंदोलन तय है!”
प्यासे भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह मामला सिर्फ एक आंगनबाड़ी का नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है। अब देखना होगा—क्या प्रशासन जागेगा या मासूमों की प्यास यूं ही सवाल बनकर रह जाएगी?
