C Prime और Go Panth के जरिए कमाई और निवेश के दावों ने बढ़ाई चिंता, लेनदेन व कारोबारी मॉडल की जांच जरूरी
शॉर्टकट में कमाई का लालच बना साइबर जाल, पहले कमीशन फिर करोड़ों का खेल!
गेम, नेटवर्क मार्केटिंग, वीडियो और Advertisement देखने से लेकर ऑनलाइन निवेश तक का झांसा; मामूली एंट्री फीस से शुरुआत, टारगेट पूरा होने तक लौटाते हैं थोड़ी-थोड़ी रकम, भरोसा बनते ही बढ़ जाता है निवेश
*शशी रंजन सिंह*
*सूरजपुर( सी एन बी लाइव न्यूज जिला ब्यूरो):---*घर बैठे कमाइए... रोजाना कमाइए... मामूली रकम लगाकर बड़ी कमाई कीजिए... ऑनलाइन दुनिया में ऐसे लुभावने ऑफर अब लोगों के लिए कमाई का जरिया कम और जोखिम का बड़ा जाल ज्यादा साबित हो रहे हैं। कभी गेम खेलने के नाम पर, कभी नेटवर्क मार्केटिंग, कभी वीडियो और Advertisement देखने पर पैसे देने का दावा, तो कभी ऑनलाइन टास्क और निवेश के जरिए निश्चित कमाई का लालच देकर लोगों को जोड़ा जा रहा है। शुरुआत में मामूली एंट्री फीस ली जाती है, फिर कमीशन और रिटर्न के नाम पर कुछ रकम वापस देकर भरोसा कायम किया जाता है। इसके बाद शुरू होता है बड़ा टारगेट, ज्यादा निवेश और नए लोगों को जोड़ने का खेल।
स्थानीय स्तर पर ऐसे संदिग्ध कमाई नेटवर्क को लेकर करोड़ों रुपये के लेनदेन की चर्चाएं हैं। हालांकि वास्तविक रकम और पूरे नेटवर्क की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आर्थिक नुकसान झेलने वाले कई लोग सामाजिक प्रतिष्ठा, परिवार में बदनामी और अपनी गलती सामने आने के डर से खुलकर शिकायत करने से भी बचते हैं।
ऐसे शुरू होता है पूरा खेल—छोटी फीस से बड़े निवेश तक
सबसे पहले लोगों तक सोशल मीडिया, व्हाट्सएप्प, टेलीग्राम या दूसरे ऑनलाइन माध्यमों से कमाई का ऑफर पहुंचता है। दावा किया जाता है कि गेम खेलने, वीडियो देखने, एडवरटाइजमेंट देखने, छोटे-छोटे टास्क करने अथवा नए सदस्यों को जोड़ने पर नियमित कमाई होगी।
इसके बाद सदस्य बनने के लिए मामूली रकम जमा कराई जाती है। रकम कम होने के कारण लोग ज्यादा जांच-पड़ताल नहीं करते। कई बार शुरुआत में छोटी कमाई या कमीशन खाते में वापस भी दिया जाता है। यही शुरुआती भुगतान व्यक्ति के मन में विश्वास पैदा करता है कि प्लेटफॉर्म वास्तविक है।
पहले थोड़ा रिटर्न, फिर बढ़ता है टारगेट
भरोसा बनने के बाद व्यक्ति को अधिक कमाई के लिए बड़ा पैकेज लेने, ज्यादा पैसा लगाने अथवा अधिक लोगों को नेटवर्क में जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब तक टारगेट पूरा नहीं होता, तब तक कमीशन या रिटर्न के नाम पर थोड़ी-थोड़ी रकम मिलती रहती है।
यही पैसा निवेशक को यह विश्वास दिलाता है कि उसका निवेश सुरक्षित है और उसे लगातार मुनाफा मिल रहा है। इसके बाद वह खुद अधिक रकम लगाता है और अपने परिचितों को भी जोड़ने लगता है।
रेफरल के जरिए फैलता जाता है नेटवर्क
कई योजनाओं में नए सदस्य जोड़ने पर निश्चित बोनस या कमीशन का लालच दिया जाता है। किसी व्यक्ति के जरिए दूसरा सदस्य जुड़ता है और उसके निवेश पर भी ऊपर के लोगों को कमीशन मिलने का दावा किया जाता है।
इस तरह एक व्यक्ति से दूसरा, दूसरे से तीसरा और फिर पूरा नेटवर्क तैयार होता जाता है। शुरुआत में छोटी रकम का लेनदेन धीरे-धीरे हजारों, लाखों और कई मामलों में करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है
पैसा निकालने की बारी आई तो सामने आने लगती हैं नई शर्तें
सबसे बड़ा संकट तब सामने आता है जब निवेशक अपनी रकम निकालना चाहता है। कई संदिग्ध योजनाओं में शिकायत रहती है कि इसके बाद टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी, टारगेट या अतिरिक्त रिचार्ज के नाम पर और रकम जमा करने को कहा जाता है।
पहले से बड़ी रकम लगाने के कारण निवेशक अपनी पूंजी वापस पाने के लिए दोबारा पैसा लगाने लगता है। इस तरह नुकसान बढ़ता जाता है।
व्हाइट मनी देकर संदिग्ध रकम लेने का भी खेल
कम मेहनत में अधिक पैसा कमाने की चाहत में कुछ लोग अपनी वैध यानी व्हाइट मनी देकर बदले में अधिक रकम लेने के लालच में भी फंस सकते हैं। यदि बदले में मिलने वाली रकम का स्रोत साइबर ठगी अथवा किसी संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा हुआ हो, तो संबंधित बैंकिंग ट्रांजेक्शन जांच के दायरे में आ सकता है।
यहीं से मामला सिर्फ निवेश की ठगी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बैंक खातों की मनी ट्रेल तक पहुंच जाता है।
एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचती है रकम
साइबर ठगी की रकम कई बार सीधे मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंचती। पैसा अलग-अलग खातों में भेजा जा सकता है और फिर आगे ट्रांसफर किया जाता है।
पीड़ित से ठगी की रकम → पहला बैंक खाता → दूसरा खाता → तीसरा खाता → आगे अन्य खाते।
जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड से इस पूरी श्रृंखला को जोड़ा जा सकता है। ऐसे में कोई व्यक्ति खुद ठगी में शामिल न होने के बावजूद यदि उसके खाते में विवादित रकम पहुंचती है तो वह भी पूछताछ या जांच की कड़ी में आ सकता है।
कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता देना पड़ सकता है भारी
कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने खाते में दूसरों की रकम मंगवाकर उसे आगे ट्रांसफर करने लगते हैं। उन्हें यह सामान्य लेनदेन बताया जा सकता है। लेकिन रकम का स्रोत यदि साइबर अपराध से जुड़ा निकलता है तो संबंधित खाते पर होल्ड, डेबिट फ्रीज या अन्य प्रतिबंध लगने की स्थिति बन सकती है।
सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब उसी खाते में व्यक्ति का वेतन, बचत या कारोबार का वैध पैसा भी जमा हो।
‘मुझे पता नहीं था’ कहकर भी खत्म नहीं होती परेशानी
बैंकिंग रिकॉर्ड में हर लेनदेन की कड़ी दर्ज होती है। पैसा कहां से आया, किस खाते में गया और किसके माध्यम से आगे बढ़ा—इन सबकी जांच की जा सकती है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम लेना या उसे आगे ट्रांसफर करना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है।
चार साल पहले दानीदाता ऐप ने भी दिखाया था यही खतरा
शॉर्टकट में कमाई और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों के फंसने का यह कोई नया मामला नहीं है। 6 जून 2022 को प्रकाशित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में भटगांव क्षेत्र के 700 से अधिक युवाओं द्वारा ‘दानीदाता’ ऐप में निवेश किए जाने और करीब एक करोड़ रुपये डूबने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार ऐप में निवेश पर नियमित कमाई और नए लोगों को जोड़ने पर बोनस का लालच दिया जाता था। शुरुआत में निवेशकों को भुगतान मिलता रहा, जिससे भरोसा बढ़ता गया। बाद में 28 मई से पैसे की निकासी बंद होने और 3 जून को ऐप बंद होने की बात सामने आई। इसके बाद 4 जून को ऐप को प्ले स्टोर से भी हटाए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि निवेशकों से Telegram के माध्यम से संपर्क किया जाता था और बाद में संबंधित चैनल का नाम बदलने तथा उसे बंद किए जाने की बात सामने आई। उसी रिपोर्ट में निवेशक निखिल सिंह द्वारा करीब दो लाख रुपये निवेश करने और रकम फंसने की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।
क्षेत्र में C Prime और Go Panth जैसे ऐप भी चर्चा में
पुराने मामलों के बावजूद ऑनलाइन कमाई और निवेश के नाम पर नए-नए प्लेटफॉर्म लगातार सामने आते रहे हैं। वर्तमान में क्षेत्र में C Prime और Go Panth नाम के दो ऐप को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा है। इन ऐप के माध्यम से कमाई, निवेश, टास्क अथवा नेटवर्क आधारित गतिविधियों से जुड़े होने की बातें सामने आ रही हैं।
हालांकि इन दोनों प्लेटफॉर्म से जुड़े वास्तविक लेनदेन, इनके कारोबार का स्वरूप और इनके माध्यम से लोगों को होने वाली कमाई के दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए इन्हें सीधे फर्जी या ठगी का ऐप कहना फिलहाल उचित नहीं होगा, लेकिन इनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन और कमाई के मॉडल की जांच की जरूरत जरूर है।
यदि किसी प्लेटफॉर्म पर पहले छोटी रकम लगाने के बाद कमीशन दिया जाता है और बाद में अधिक निवेश अथवा नए सदस्यों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पुराना मामला याद दिलाता है बड़ा सवाल
दानीदाता प्रकरण में सामने आया घटनाक्रम यह सवाल खड़ा करता है कि नाम, ऐप और कमाई का तरीका बदल जाने के बावजूद क्या शॉर्टकट कमाई का लालच फिर लोगों को उसी तरह के जोखिम में धकेल रहा है? पुराने मामले में भी शुरुआत कमाई और नियमित रिटर्न के दावे से हुई थी और बाद में निवेशकों की रकम फंसने की शिकायत सामने आई थी।
करोड़ों के लेनदेन की चर्चा, लेकिन पीड़ित चुप
ऐसे मामलों में वास्तविक नुकसान का आंकड़ा सामने लाना इसलिए भी मुश्किल होता है क्योंकि कई लोग शिकायत करने से बचते हैं। कोई परिवार में बदनामी से डरता है तो कोई परिचितों के सामने अपनी आर्थिक स्थिति और निवेश का खुलासा नहीं करना चाहता। कुछ लोग इस उम्मीद में भी चुप रहते हैं कि शायद उनका पैसा बाद में वापस मिल जाए।
यही चुप्पी संदिग्ध नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा फायदा बन सकती है।
नॉमिनल एंट्री फीस से शुरू हुआ खेल कब लाखों तक पहुंच जाता है, पता ही नहीं चलता
कुछ सौ रुपये से शुरुआत होती है। फिर कमीशन मिलता है। स्क्रीन पर कमाई बढ़ती दिखाई देती है। नए लोगों को जोड़ने पर बोनस मिलता है। भरोसा बढ़ता है तो निवेश बढ़ता है। निवेश बढ़ता है तो टारगेट बढ़ता है और पैसा निकालने की कोशिश पर नई शर्तें सामने आ सकती हैं।
यानी पूरा खेल ‘पहले थोड़ा दो—थोड़ा पाओ—फिर ज्यादा लगाओ’ की मानसिकता पर आगे बढ़ सकता है।
सावधान! शॉर्टकट की कमाई कहीं जिंदगीभर की कमाई न डुबो दे
ऑनलाइन गेम, नेटवर्क मार्केटिंग, वीडियो या Advertisement देखने, टास्क, रेफरल अथवा निवेश के नाम पर मिलने वाले हर ऑफर को फर्जी कहना सही नहीं होगा, लेकिन गारंटीड रिटर्न, कम मेहनत में ज्यादा कमाई और जल्दी पैसा बढ़ने के दावों की पूरी जांच जरूरी है।
अपने बैंक खाते को किसी दूसरे व्यक्ति के लेनदेन के लिए इस्तेमाल न होने दें। अनजान स्रोत से आई रकम को आगे ट्रांसफर न करें और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी को उपलब्ध न कराएं।
क्योंकि शॉर्टकट में कमाई का सपना दिखाने वाले जाल में शुरुआत में कुछ रुपये कमीशन के रूप में वापस मिल सकते हैं, लेकिन अंत में फंस सकती है पूरी पूंजी—और कभी-कभी अपना बैंक खाता भी।
