एनर्जी ड्रिंक: एनर्जी का दावा, शरीर पर बढ़ता बोझ!
Gen Z और युवाओं में तेजी से बढ़ रहा कैफीनयुक्त पेय का चलन, कुछ देर की चुस्ती के लिए शरीर में पहुंच रही कैफीन और अतिरिक्त शुगर
*शशी रंजन सिंह*
*सूरजपुर(ट्रैक सी जी न्यूज जिला ब्यूरो):---* आज की युवा पीढ़ी को सब कुछ तेज चाहिए—तेज इंटरनेट, तेज काम, तेज मनोरंजन और अब फटाफट एनर्जी भी। इसी बदलती जीवनशैली के बीच एनर्जी ड्रिंक युवाओं और खासकर Gen Z के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कॉलेज कैंपस से लेकर जिम, गेमिंग जोन, ऑफिस, कैफे और देर रात तक चलने वाली पढ़ाई तक, हाथों में एनर्जी ड्रिंक की कैन नजर आना अब आम होता जा रहा है।
एनर्जी ड्रिंक के आकर्षक विज्ञापन युवाओं को यह संदेश देते हैं कि इनका सेवन करने के बाद थकान दूर होगी, शरीर एक्टिव रहेगा और प्रदर्शन बेहतर होगा। लेकिन इस चमकदार प्रचार के पीछे एक अहम सवाल खड़ा होता है—क्या यह वास्तव में शरीर को ऊर्जा देता है या कुछ समय के लिए थकान और नींद के संकेतों को दबाकर व्यक्ति को ज्यादा सक्रिय महसूस कराता है?
कई एनर्जी ड्रिंक में कैफीन और अतिरिक्त शुगर प्रमुख घटक होते हैं। कैफीन व्यक्ति को कुछ समय के लिए अधिक सतर्क और जागरूक महसूस करा सकती है, जबकि शुगर कैलोरी उपलब्ध कराती है। लेकिन इसे शरीर की थकान का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।
कुछ देर की चुस्ती, फिर वही थकान
एनर्जी ड्रिंक पीने के बाद युवा खुद को ज्यादा एक्टिव महसूस कर सकते हैं। आंखों से नींद गायब लगती है, काम करने की क्षमता बढ़ी हुई महसूस होती है और लंबे समय तक जागना आसान लगता है। यही अनुभव युवाओं को दोबारा इसे पीने के लिए प्रेरित कर सकता है।
लेकिन असली समस्या यहीं से शुरू होती है।
यदि शरीर को पर्याप्त नींद की जरूरत है और उस समय कैफीन के सहारे जागते रहने की आदत बन जाए, तो शरीर की प्राकृतिक जरूरत पूरी नहीं होती। लगातार ऐसा करने पर नींद का चक्र प्रभावित हो सकता है और व्यक्ति अगले दिन फिर थकान महसूस कर सकता है। इसके बाद दोबारा कैफीन का सहारा लेने का सिलसिला शुरू हो सकता है।
यानी थकान खत्म नहीं होती, बल्कि कुछ समय के लिए उसका एहसास दब जाता है।
कैन छोटी, लेकिन कैफीन और शुगर का हिसाब बड़ा
युवाओं के बीच एनर्जी ड्रिंक की सबसे बड़ी चिंता इसके अत्यधिक और बार-बार सेवन को लेकर है। अलग-अलग उत्पादों में कैफीन और शुगर की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी एनर्जी ड्रिंक को पीने से पहले उसके लेबल पर लिखी सामग्री और मात्रा को समझना जरूरी है।
एक कैन को मामूली समझकर पी लेना आसान है, लेकिन यदि इसके साथ चाय, कॉफी, कोला या अन्य कैफीनयुक्त पदार्थ भी दिनभर लिए जा रहे हों तो कुल कैफीन सेवन काफी बढ़ सकता है।
इसी तरह लगातार मीठे पेय पदार्थों का सेवन अतिरिक्त शुगर की मात्रा बढ़ा सकता है। लंबे समय तक अधिक शुगर वाले पेय लेने की आदत वजन बढ़ने और दांतों से जुड़ी समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है।
जिम जाने वाले युवाओं में भी बढ़ा क्रेज
फिटनेस और जिम कल्चर के बढ़ने के साथ एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल भी बढ़ा है। कई युवा वर्कआउट से पहले या बाद में इसे लेते हैं और मानते हैं कि इससे उन्हें ज्यादा ताकत मिलेगी।
लेकिन हर एनर्जी ड्रिंक स्पोर्ट्स ड्रिंक नहीं होता और हर कैफीनयुक्त पेय व्यायाम के लिए जरूरी नहीं है।
शरीर को व्यायाम के दौरान वास्तव में क्या चाहिए, यह व्यक्ति की गतिविधि, उसकी अवधि, पसीने की मात्रा और पोषण पर निर्भर करता है। केवल आकर्षक पैकेजिंग या विज्ञापन देखकर किसी पेय को फिटनेस का हिस्सा बना लेना उचित नहीं है।
गेमिंग और देर रात पढ़ाई में भी बढ़ता इस्तेमाल
ऑनलाइन गेमिंग, स्ट्रीमिंग और देर रात तक पढ़ाई करने वाले युवाओं में भी कैफीनयुक्त पेय का इस्तेमाल तेजी से दिखाई देता है। घंटों स्क्रीन के सामने बैठने के दौरान नींद आने पर कई युवा एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं।
एक तरफ मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन के कारण सोने का समय प्रभावित होता है, दूसरी तरफ कैफीन नींद को और पीछे धकेल सकती है। परिणामस्वरूप देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना और पूरे दिन थकान महसूस करना एक चक्र का रूप ले सकता है।
युवा सोचता है कि वह एनर्जी ले रहा है, जबकि शरीर शायद आराम मांग रहा होता है।
सोशल मीडिया ने बढ़ाया 'कूल' कल्चर
एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर जिम, गेमिंग, ट्रैवल, नाइट आउट और पार्टी कल्चर के साथ इन पेय पदार्थों को 'कूल लाइफस्टाइल' के हिस्से के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है।
युवा वर्ग अक्सर अपने पसंदीदा इन्फ्लुएंसर, खिलाड़ी या सेलिब्रिटी को देखकर उत्पादों की ओर आकर्षित होता है। आकर्षक पैकेजिंग, नए फ्लेवर और सीमित समय के ऑफर इस बाजार को और मजबूत कर रहे हैं।
ऐसे में जरूरत है कि युवा विज्ञापन और वास्तविक स्वास्थ्य जरूरत के बीच अंतर समझें।
दिल की धड़कन तेज, बेचैनी और नींद पर असर की शिकायत हो सकती है
कैफीन हर व्यक्ति को एक जैसा प्रभावित नहीं करती। अधिक मात्रा में कैफीन लेने पर कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट, सिरदर्द, नींद में परेशानी या दिल की धड़कन तेज महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों और किशोरों में कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। जिन लोगों को पहले से कैफीन के प्रति संवेदनशीलता है या वे किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें सेवन को लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
'एनर्जी' के नाम पर कहीं आदत तो नहीं बन रही?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या युवा एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल कभी-कभार कर रहे हैं या यह उनकी रोजाना की जरूरत बनता जा रहा है।
अगर सुबह उठते ही कैफीन, पढ़ाई के समय कैफीन, जिम से पहले कैफीन और रात में जागने के लिए फिर कैफीन की जरूरत महसूस होने लगे, तो यह केवल पसंद नहीं बल्कि निर्भरता जैसी आदत की ओर संकेत हो सकता है।
शरीर की थकान को बार-बार कैफीन से दबाना स्वस्थ जीवनशैली का विकल्प नहीं हो सकता।
असली एनर्जी कैन में नहीं, दिनचर्या में है
शरीर को स्वस्थ तरीके से ऊर्जा देने के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और सही दिनचर्या सबसे महत्वपूर्ण हैं।
यदि कोई युवा लगातार थका हुआ महसूस करता है, तो हर बार एनर्जी ड्रिंक लेने के बजाय यह समझना जरूरी है कि आखिर थकान का कारण क्या है। नींद पूरी नहीं हो रही है? भोजन संतुलित नहीं है? पानी कम पी रहे हैं? लगातार स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं? या मानसिक दबाव ज्यादा है?
इन सवालों का जवाब तलाशना ज्यादा जरूरी है।
युवाओं के लिए जरूरी संदेश
एनर्जी ड्रिंक को 'जहर' कहना भी सही नहीं होगा और इसे स्वास्थ्यवर्धक ऊर्जा का स्रोत मानना भी। इसका असर उत्पाद में मौजूद कैफीन, शुगर, सेवन की मात्रा और व्यक्ति की व्यक्तिगत संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। असली चिंता तब बढ़ती है जब इसका सेवन अधिक, बार-बार या नींद और स्वस्थ भोजन की जगह होने लगे।
कुछ समय के लिए जागना और वास्तव में ऊर्जावान होना—दो अलग बातें हैं।
आज Gen Z के सामने चुनौती सिर्फ एनर्जी ड्रिंक से बचने की नहीं, बल्कि उस जीवनशैली से बचने की भी है जिसमें नींद कम हो, तनाव ज्यादा हो और हर थकान का समाधान किसी कैन में तलाशा जाए।
सबसे बड़ा सवाल—शरीर को एनर्जी चाहिए या आराम?
जब शरीर थककर आराम मांग रहा हो, तब कैफीन से उसे चुप करा देना समाधान नहीं है।
एनर्जी ड्रिंक आपको कुछ समय के लिए एक्टिव महसूस करा सकता है, लेकिन स्वस्थ शरीर की असली ऊर्जा नींद, पोषण और संतुलित जीवनशैली से आती है।
युवाओं को यह समझना होगा कि कैन खोलकर मिलने वाली कुछ घंटों की चुस्ती, स्वस्थ जीवनशैली की जगह नहीं ले सकती।
