इस व्यवस्था को लेकर राजीव गुप्ता ने शासन और प्रशासन से सवाल उठाते हुए कहा है कि किसानों और आम नागरिकों से सीधे जुड़े इतने महत्वपूर्ण कार्यालय के लिए अब तक स्थायी भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में न तो जवाबदेह जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रभावी पहल दिखाई दी और न ही प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रयास नजर आया। पहले तहसील कार्यालय वर्षों तक जर्जर भवन में संचालित होता रहा और अब उधार के भवन में वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे चल रहा है।
‘यह सिर्फ भवन का नहीं, जनता की प्राथमिकताओं का सवाल’
राजीव गुप्ता के अनुसार, यह मामला केवल तहसील कार्यालय के भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल जनता की बुनियादी जरूरतों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि जनता की सेवा, सम्पूर्ण विकास और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद कई बुनियादी समस्याओं का समाधान तब तक नहीं होता, जब तक जनता स्वयं आवाज न उठाए।
पुराने सरकारी परिसर में संयुक्त प्रशासनिक भवन का सुझाव
राजीव गुप्ता ने बैकुण्ठपुर की पुरानी सिविल लाइन क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग का सुझाव देते हुए कहा कि कलेक्टर कार्यालय की तर्ज पर एक बहुउद्देशीय संयुक्त प्रशासनिक भवन बनाया जा सकता है।
उनके प्रस्ताव के अनुसार पुराने तहसील कार्यालय, पुराने एसपी एवं एसडीएम कार्यालय तथा खेल एवं युवा कल्याण कार्यालय क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी भूमि का समुचित उपयोग किया जाए। एसपी कार्यालय के नए भवन में स्थानांतरित होने के बाद उपलब्ध भूमि का उपयोग दो चरणों में संयुक्त प्रशासनिक परिसर विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
इस परिसर में—
तहसील कार्यालय
एसडीएम कार्यालय
रोजगार कार्यालय
आरआई एवं पटवारी कार्यालय
जर्जर या किराये के भवनों में संचालित अन्य कार्यालय
मनेंद्रगढ़ में संचालित कोरिया जिले के जिला स्तरीय कार्यालय
को एक ही परिसर में लाने की योजना बनाई जा सकती है।
जनता को मिलेगी बड़ी राहत
संयुक्त प्रशासनिक परिसर बनने से आम नागरिकों और किसानों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। सभी कार्यालय एक ही परिसर में होने से आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सुविधा होगी।
राजीव गुप्ता का कहना है कि इससे बैकुण्ठपुर की पुरानी सिविल लाइन को दोबारा प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोर्ट, एसपी कार्यालय और अन्य कार्यालय शहर के बाहर जाने के कारण पुरानी सिविल लाइन की रौनक और व्यापारिक गतिविधियों में कमी आई है। ऐसे में यदि पुराने क्षेत्र में संयुक्त प्रशासनिक परिसर विकसित किया जाता है तो इससे क्षेत्र में फिर से चहल-पहल बढ़ने के साथ स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिल सकता है।
अब सवाल शासन-प्रशासन से
ढाई वर्षों से वैकल्पिक भवन में संचालित तहसील कार्यालय को स्थायी भवन कब मिलेगा? क्या उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग कर बैकुण्ठपुर में संयुक्त प्रशासनिक परिसर विकसित किया जाएगा? और क्या इस दिशा में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि अब ठोस पहल करेंगे?
अब शहरवासियों की नजर इन सवालों के जवाब पर है।


