नवी मुंबई में हंगामे से मचा हड़कंप, संभाजी ब्रिगेड के तीन कार्यकर्ता गिरफ्तार; पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित
नवी मुंबई। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों में बढ़ता आक्रोश अब उग्र विरोध में बदल गया है। शुक्रवार, 11 सितंबर को नवी मुंबई के CBD-बेलापुर स्थित MPSC कार्यालय में संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने आयोग के सचिव महेंद्र हरपालकर के चेहरे पर काली स्याही/कालिख पोत दी। घटना के बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
दस्तावेज और किताब देने के बहाने कार्यालय में पहुंचे
रिपोर्टों के अनुसार, तीन कार्यकर्ता MPSC सचिव से मिलने के लिए पहले समय लेकर पहुंचे थे। उन्होंने पेपर लीक से जुड़े कथित सबूत और एक किताब सौंपने की बात कही। सचिव के कार्यालय में पहुंचने के बाद दो लोगों ने काला पाउडर उनके सिर और चेहरे पर डाल दिया, जबकि तीसरे व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया।
घटना के बाद सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को सूचना दी। नवी मुंबई पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। घटना के बाद MPSC कार्यालय की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई।
पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर गुस्सा
यह पूरा विवाद MPSC की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध के बीच सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों सहित पिछले वर्ष की MPSC मुख्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की ओर से MPSC के चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है। संभाजी ब्रिगेड ने भी आयोग के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
सरकार ने बनाई SIT
विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में हुई MPSC परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की जांच की जाएगी।
हिंसक विरोध की भी हुई निंदा
जहां प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई को अभ्यर्थियों के गुस्से का प्रतीक बताया, वहीं राजनीतिक नेताओं ने कानून हाथ में लेने की घटना की निंदा की है। नेताओं का कहना है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामले की जांच होनी चाहिए, लेकिन विरोध संवैधानिक और कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए।
फिलहाल सचिव के चेहरे पर कालिख पोते जाने की घटना ने MPSC पेपर लीक विवाद को और गरमा दिया है। अब SIT की जांच में पेपर लीक और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर अभ्यर्थियों और पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।


