CG "क्या जिला प्रशासन कर रहा है बड़े दुर्घटना का इंतजार...? जर्जर पुल बना हादसे का खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा... जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण, स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल...देंखे?
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CG "क्या जिला प्रशासन कर रहा है बड़े दुर्घटना का इंतजार...? जर्जर पुल बना हादसे का खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा... जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण, स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल...देंखे?

 

गरियाबंद। जिले के जनपद पंचायत छुरा ग्राम सारागांव में जर्जर हो चुका पुल इन दिनों ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरे का कारण बना हुआ है। लंबे समय से खराब हालत में पड़े इस पुल से रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन होता है। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।


ग्रामीणों के मुताबिक पुल काफी समय से क्षतिग्रस्त है। इसके बावजूद अब तक इसकी स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई है। बारिश के मौसम में पुल पर खतरा और बढ़ गया है। पानी बढ़ने अथवा पुल के कमजोर हिस्से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में आवागमन पूरी तरह बाधित होने के साथ गंभीर दुर्घटना भी हो सकती है।


कई बार ध्यान दिलाने के बाद भी नहीं हुआ समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि आखिर प्रशासन किसी हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले ही पुल की मरम्मत कराकर लोगों की जान सुरक्षित करेगा।


स्कूली बच्चों की आवाजाही सबसे बड़ी चिंता

पुल से प्रतिदिन स्कूली बच्चों का भी आवागमन होता है। ऐसे में पुल की खराब स्थिति बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले को सामान्य समस्या मानने के बजाय सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषय के रूप में लेना चाहिए।


ग्रामीणों ने की तत्काल निरीक्षण और मरम्मत की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल का तत्काल मौके पर निरीक्षण कराया जाए। पुल की तकनीकी स्थिति की जांच कर आवश्यकतानुसार मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए। लोगों का कहना है कि किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते कदम उठाना ही जिम्मेदार प्रशासन की पहचान है।


अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और सारागांव के ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा कब तक मिलती है।

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