40 दिन बाद भी नहीं बना टूटा पुल, हजारों ग्रामीण परेशान
गरियाबंद। मानसून की पहली मूसलाधार बारिश के दौरान तेज बहाव में छुरा-कुसमुंडा-सारागांव-चुरकीदादर मार्ग पर स्थित मुख्य पुल बह गया था। घटना को 40 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नए पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, किसानों और वाहन चालकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
पुल टूटने के बाद से इस मार्ग पर आवागमन बेहद मुश्किल और जोखिमपूर्ण हो गया है। रोजाना इस रास्ते से आने-जाने वाले ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं स्कूली बच्चों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए भी लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
हादसे के बाद ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
टूटे पुल के पास रास्ता बेहद खतरनाक स्थिति में है। हाल ही में एक स्थानीय युवक टूटे पुल के समीप गहरी खाई में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में उसके सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। डायल-112 पुलिस वाहन की मदद से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए राजिम अस्पताल रेफर किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल टूटने के बाद यदि प्रशासन द्वारा पर्याप्त बैरिकेडिंग के साथ दूर से दिखाई देने वाले चेतावनी बोर्ड लगाए जाते और उनकी नियमित निगरानी की जाती, तो हादसे की आशंका को कम किया जा सकता था।
40 दिन बाद भी निर्माण शुरू नहीं
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुल टूटे 40 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ?
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में इस मार्ग की स्थिति और गंभीर हो सकती है। यदि जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और आम राहगीरों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है।
विभाग ने कहा- कराई गई थी बैरिकेडिंग
घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के एसडीओ मनीष साहू ने विभाग का पक्ष रखते हुए बताया कि पुल टूटने के बाद मौके पर बैरिकेडिंग कराई गई थी। हालांकि बाद में अज्ञात लोगों द्वारा बैरिकेडिंग हटा दी गई।
विभाग की इस सफाई के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि बैरिकेडिंग लगाना और उसका हट जाना अलग विषय है, लेकिन मूल सवाल अब भी वहीं है कि पुल टूटने के इतने दिनों बाद भी स्थायी निर्माण कार्य धरातल पर क्यों नहीं शुरू हुआ।
चक्काजाम की तैयारी में ग्रामीण
समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों के बीच बैठक और चर्चा का दौर तेज हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम और आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी बैरिकेडिंग या वैकल्पिक रास्ते समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। इस मार्ग से जुड़े हजारों लोगों की परेशानी को देखते हुए पुल का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की दो टूक—अब चाहिए स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आसपास के गांवों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके टूटने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजमर्रा की आवाजाही सीधे प्रभावित हो रही है।
अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से दो टूक कहा है कि आश्वासन और अस्थायी व्यवस्था बहुत हो चुकी, अब पुल का स्थायी निर्माण चाहिए।
यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों का आंदोलन और चक्काजाम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


