**स्थान:** मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़)
**संवाददाता:** संतोष सिंह सूर्यवंशी (CNB LIVE NEWS)
**मनेन्द्रगढ़।** जिला स्वास्थ्य विभाग मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में बर्खास्त महिला स्वास्थ्य कर्मचारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के बीच उठा विवाद गहराता जा रहा है। बर्खास्त एएनएम (ANM) ममता सिंह द्वारा CMHO डॉ. अविनाश खरे पर ₹50,000 की रिश्वत मांगने और अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, CMHO डॉ. खरे ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दबाव बनाने की रणनीति करार दिया है।
### "साक्ष्य हों तो सार्वजनिक करें या सक्षम प्राधिकारी को दें" — CMHO
मामले पर अपना पक्ष रखते हुए CMHO डॉ. अविनाश खरे ने स्पष्ट कहा कि यदि ममता सिंह के पास ₹50,000 की मांग या अभद्र व्यवहार से जुड़ा कोई भी ठोस प्रमाण है, तो वे उसे सार्वजनिक करें या शासन/प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। डॉ. खरे ने कहा, *"बिना किसी तथ्य और प्रमाण के किसी जिम्मेदार अधिकारी पर आरोप लगाना कतई उचित नहीं है। मैं पूरी पारदर्शिता से काम करता हूं और नियम विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं करूंगा।"*
### 2016 में न्यायालयीन फैसले के बाद हुई थी सेवा समाप्ति
विभागीय अभिलेखों के अनुसार, मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी जड़ें पुरानी न्यायालयीन कार्रवाई से जुड़ी हैं।
कार्यालयीन दस्तावेजों के मुताबिक, ममता सिंह (तत्कालीन एएनएम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर) को अपर सत्र न्यायाधीश मनेन्द्रगढ़ द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 एवं धारा 314 के तहत दोषी पाया गया था। न्यायालय द्वारा उन्हें 07 वर्ष एवं 05 वर्ष के सश्रम कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। इसी फैसले के परिपालन में 28 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1966 के तहत उनकी सेवाएं समाप्त (Terminate) कर दी गई थीं।
### देय राशियों के भुगतान के लिए मांगा गया है उच्च स्तरीय मार्गदर्शन
वर्तमान में ममता सिंह द्वारा अपने लंबित स्वत्वों (जैसे—जीआईएस, जीपीएफ, वार्षिक वेतन वृद्धि एरियर राशि आदि) के भुगतान हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
इस संबंध में विभागीय पत्राचार और जिला कोषालय अधिकारी के पत्रों से स्पष्ट होता है कि प्रकरण माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर याचिका के तहत विचाराधीन है। CMHO कार्यालय द्वारा संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं (रायपुर) एवं उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर उचित मार्गदर्शन मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उच्च स्तर से नियमानुसार निर्देश प्राप्त होते ही पात्र राशियों के भुगतान की अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।
> **संपादकीय टिप्पणी:**
> शासकीय प्रक्रिया और अदालती मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की अपनी एक सीमा होती है। विभाग का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर ही हर संभव सहयोग किया जा रहा है, लेकिन बिना प्रमाण के लगाए जा रहे आरोपों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
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