*भटगांव थाना प्रभारी के खिलाफ भाजपा का खुला विद्रोह*I

*भटगांव थाना प्रभारी के खिलाफ भाजपा का खुला विद्रोह*I

शशि रंजन सिंह
*दर्जनों पदाधिकारी, कई भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधि और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन ने खड़े किए बड़े सवाल*

*आखिर क्यों अपनी ही सरकार के पुलिस अधिकारी के खिलाफ एकजुट हुआ संगठन? वाहन चेकिंग के नाम पर वसूली से लेकर संरक्षण तक के गंभीर आरोप*
*सूरजपुर/भटगांव:--* जिले के भटगांव थाना प्रभारी के खिलाफ भाजपा संगठन के भीतर लंबे समय से पनप रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। भाजपा मंडल के दर्जनों पदाधिकारियों, विभिन्न मोर्चों के प्रतिनिधियों, भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए थाना प्रभारी के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है।
इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि सत्ताधारी दल से जुड़े लोग ही अपनी सरकार के पुलिस अधिकारी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने को मजबूर हो गए?

*सैकड़ों हस्ताक्षरों के साथ उठी तबादले की मांग*

भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से थाना प्रभारी को तत्काल हटाने और उनका अन्यत्र स्थानांतरण करने की मांग की गई है। ज्ञापन पर भाजपा मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रतिनिधियों, भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली से आम जनता के साथ-साथ संगठन के लोग भी परेशान हैं और कई बार मौखिक शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।

*वाहन चेकिंग के नाम पर 10 से 15 हजार रुपये तक की कथित वसूली का आरोप*

ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप वाहन जांच अभियान को लेकर लगाए गए हैं। आरोप है कि वाहन चेकिंग के नाम पर आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं से 10 से 15 हजार रुपये तक की कथित अवैध वसूली की जा रही है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इससे क्षेत्र में भय और असंतोष का वातावरण निर्मित हुआ है तथा आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास कमजोर पड़ रहा है।

*बिना पर्याप्त जांच एफआईआर दर्ज करने का आरोप*

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में बिना पर्याप्त जांच किए एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जिससे निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि निष्पक्ष जांच के बजाय जल्दबाजी में कार्रवाई की प्रवृत्ति से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।

*फोन उठाने से लेकर व्यवहार तक पर उठे सवाल*

भाजपा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी द्वारा शिकायतकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र एवं असंवेदनशील व्यवहार किया जाता है। ज्ञापन में उल्लेख है कि फोन पर संपर्क करने वाले लोगों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और कई बार उनके साथ अनुचित व्यवहार भी किया जाता है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद का यह तरीका पुलिस की छवि को प्रभावित कर रहा है।

*अवैध कारोबार को संरक्षण देने के आरोप भी शामिल*

ज्ञापन में क्षेत्र में संचालित कथित अवैध कोयला और कबाड़ कारोबार को संरक्षण दिए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी जांच रिपोर्ट का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

*भाजपा मंडल उपाध्यक्ष के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला भी बना कारण*

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ समय पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष को आधी रात थाने ले जाकर उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया तथा जेल भेजने की धमकी दी गई।

भाजपा कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस घटना के बाद संगठन के भीतर असंतोष और गहरा गया और कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन के सम्मान से जुड़ा विषय मान लिया।

*कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी*

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि थाना प्रभारी का स्थानांतरण नहीं किया जाता और आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो संगठन आगे व्यापक आंदोलन का रास्ता अपना सकता है।

सूत्रों के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने इसे केवल एक प्रशासनिक शिकायत नहीं बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया है।

*सबसे बड़ा सवाल, जब अपनी ही सरकार में उठे विरोध के स्वर...*

यह पूरा मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि विरोध किसी विपक्षी दल द्वारा नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब किसी क्षेत्र में संगठन के इतने बड़े वर्ग द्वारा सामूहिक रूप से किसी अधिकारी के खिलाफ ज्ञापन सौंपा जाता है, तो उसे केवल सामान्य असंतोष मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता बेहद आवश्यक हो जाती है।

*थाना प्रभारी का पक्ष आना अभी बाकी*

भटगांव थाना प्रभारी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में दर्ज आरोप हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। संबंधित थाना प्रभारी का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

ऐसे में निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों की बात सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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