हाईकोर्ट के स्टे आदेश की अवहेलना का आरोप, मलेरिया अधिकारी ने लगाया प्रताड़ना का आरोपI

हाईकोर्ट के स्टे आदेश की अवहेलना का आरोप, मलेरिया अधिकारी ने लगाया प्रताड़ना का आरोपI

शशि रंजन सिंह

*शशी रंजन सिंह* 

*अंबिकापुर (सी एन बी लाइव न्यूज ब्यूरो चीफ):--* सरगुजा जिले के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता से जुड़े प्रकरण में हाईकोर्ट के स्टे आदेश के बावजूद विभागीय कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में न्यायालय के आदेशों की कथित अनदेखी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश गुप्ता को उनके पद पर यथावत बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से विवाद बढ़ गया है। आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले में यह भी बताया जा रहा है कि डॉ. गुप्ता के खिलाफ जारी निलंबन आदेश पहले ही निरस्त किया जा चुका है। इसके बाद भी उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश किए जाने की चर्चा सामने आई है, जिससे पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
इस संबंध में मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ झूठे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) कभी भी उनसे नहीं मांगी गई, क्योंकि सेवा पुस्तिका संबंधित कार्यालय में ही संधारित की जाती है। इसके बावजूद भ्रामक जानकारी फैलाकर उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार तैयार किया जा रहा है।
डॉ. गुप्ता ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर न्यायालय के आदेश की अनदेखी की जा रही है और उन्हें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा ईर्ष्या एवं द्वेषपूर्ण भावना से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें प्रतिदिन मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है तथा न्यायालय अवकाश की स्थिति का लाभ उठाकर उनके खिलाफ मनमानी कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि न्यायालय के आदेश के बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई की जा रही है तो यह गंभीर विषय माना जा रहा है। हालांकि मामले में विभागीय अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं तथा न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
To Top